हलक को मयस्सर नहीं, पानी से नहा रहीं सड़कें

यह मंजर देखिए। जीटी रोड पर श्रमायुक्त कार्यालय के पास सड़क पर एक गहरा गड्ढा बन गया है। इसमें लीकेज का पानी भरा है। आसपास के रहने वाली महिलाएं और बच्चे यहीं से पानी भरते हैं। इसे ही पीते हैं और इसी से रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करते हैं। शहर में पानी की तंगी और बर्बादी दोनों का यह साक्षात् नमूना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अफसरों को शायद नागरिकों की फिक्र नहीं है। उन्हें शहर में पानी को तरसते, नलों पर लंबी लाइनें लगाए लोग नहीं दिखते। न ही सबमर्सिबल से सड़कों को नहलाते लोग दिखाई देते हैं। जलकल, जलनिगम से लेकर कई विभाग इसके जिम्मेदार हैं, मगर सब चुप्पी साधे हैं। सबसे ज्यादा अखरती है जिला प्रशासन की खामोशी। जो हर विभाग को महज हिदायत देकर ही इस नजारे को बदल सकता है। मगर ऐसा कभी होता नहीं..

हेडिंग :: पेयजल आपूर्ति को तरस रहा चौथाई शहर

क्रासर ::

– कहीं वाटर लाइन नहीं तो कहीं आपूर्ति होने का इंतजार

– सार्वजनिक स्थानों पर स्टैंडपोस्ट और हैंडपंप नहीं दिखते

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कानपुर : रावतपुर चौराहे से कंपनीबाग होते हुए मालरोड तक अगर प्यास लग जाए तो कहीं भी कोई नल नहीं मिलेगा। वाटर एटीएम तक नहीं हैं। केवल दुकानों का ही सहारा है। उधर, कल्याणपुर समेत शहर का एक चौथाई हिस्सा ऐसा है। जहां पीने से लेकर नहाने तक के पानी का इंतजाम खुद ही करना पड़ता है, क्योंकि कुछ इलाकों में वाटर लाइन नहीं है तो कुछ में लाइन तो है, लेकिन आपूर्ति शुरू ही नहीं हुई। जलकल और जल निगम की शहर में यह बड़ी नाकामी है कि वह लोगों को पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। जलनिगम अभी तक जिन क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछा चुका है, वहां की टेस्टिंग पूरी नहीं करा पाया। उधर, जलकल आए दिन लीकेज से जूझ रहा है। इन दोनों विभागों की नाकामी का असर है कि शहर में बड़े पैमाने पर निजी बोरिग और सबमर्सिबल पंप भूजल का दोहन कर रहे हैं।

यहां वाटर लाइन है, आपूर्ति नहीं

कल्याणपुर, मिर्जापुर, कृष्णानगर, गांधीग्राम, जाजमऊ, चकेरी, सजारी, देहली सुजानपुर, श्यामनगर, आजादनगर, विष्णुपुरी, सफीपुर, नौबस्तापूर्व, हरजेंदरनगर, ओमपुरवा, पशुपतिनगर, तिवारीपुर, चंदारी, रविदासपुरम, शेखपुर प्योंदी, कर्रही। यहां नहीं बिछी वाटर लाइन

कल्याणपुर आंशिक, यशोदानगर आंशिक, संघर्षनगर, शंकराचार्य नगर, दामोदरनगर, गोपालनगर, यहां न हैंडपंप, न स्टैंडपोस्ट

रावतपुर क्रासिंग, झकरकटी बस अड्डे के बाहर, परेड चौराहा, घंटाघर चौराहा, जरीब चौकी, गुमटी क्रासिंग, कोकाकोला चौराहा।

 :: बेमोल बह रहा पानी, उखड़ गई सड़कें

– लीकेज से मरम्मत के बाद भी नहीं सुधर रहीं सड़कें

– विभागीय लापरवाही से करोड़ों लीटर पानी हो रहा बर्बाद

जागरण संवाददाता, कानपुर : शहर में पानी बर्बादी थम नहीं रही है। वाटर लाइन की लीकेज से सड़कों की हालत खस्ता है। फिर भी जलकल, जल निगम इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर पा रहे हैं। इससे नागरिकों को दोहरी समस्या झेलनी पड़ रही है। एक ओर उन्हें शुद्ध पानी नहीं मिलता, दूसरे गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक गड्ढे बने रहते हैं।

जीटी रोड से गुजरिए तो वाटर लाइन में लीकेज के कारण श्रमायुक्त कार्यालय के पास गहरा गड्ढा बना है। भन्नाना का पुरवा के पास सड़क बुरी तरह से उखड़ी है। उधर संगीत टाकीज की तरफ देखिए तो यहां भी पानी बह रहा है और सड़क उखड़ी है। गौशाला चौराहा, किदवई नगर का साइड नंबर वन सहित ऐसे कई प्रमुख स्थान हैं, जहां सड़कों की हालत खस्ता है। यह हाल तो मुख्य सड़कों का है। शहर के गली मोहल्लों में तो ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। जहां लीकेज ठीक होने के बाद महीनों तक सड़कें नहीं बनतीं।

यहां भी है लीकेज

नवाबगंज में चिड़ियाघर वाली रोड पर, जूही, किदवईनगर, गुजैनी, गौशाला चौराहा।

लीकेज के कारण यहां उखड़ी हैं सड़कें

बीमा चौराहा नवाबगंज, लाल इमली चौराहा, इंदिरानगर, आवास विकास कल्याणपुर आदि। एक-दूजे पर उंगली नहीं उठाते विभाग

शहर में सड़कें खराब होने से लोक निर्माण विभाग के एनएच खंड से लेकर दूसरे खंडों और नगर निगम को भारी नुकसान होता है। इन विभागों को लाखों रुपये का बजट इनकी मरम्मत पर खर्च करना पड़ता है। फिर भी ये विभाग इसके खिलाफ प्रशासन को ठोस कार्रवाई के लिए पत्र नहीं भेजते। इसका खामियाजा सिर्फ जनता ही भुगतती है।

पेयजल संकट की समस्या का समाधान कराएंगे। लीकेज क्यों हो रहा है इसकी जानकारी संबंधित विभाग से ली जाएगी।- विजय विश्वास पंत, डीएम