चौथा चरण : अब कानपुर क्षेत्र में सिमटा चुनावी युद्ध

दिल्ली के लिए संसदीय चुनावों की राह उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरती है, यही कारण है कि लोकसभा के चुनावों में सारे देश की नजरें यूपी के सियासी हालात पर टिकी हैं।यूपी में कानपुर क्षेत्र, पूर्वाचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तीन प्रमुख केंद्र हैं, जहां की चुनावी गर्माहटकी तपिश सीधे दिल्ली तक महसूस की जाती है। इनमें से कानपुर और इसके आसपास का इलाका राजनीतिक दृष्टि से काफी परिपक्व समझा जाता है, इसका साक्षी इलाके का पुराना इतिहास और वर्तमान समय का गहरा सियासी चुनावी गणित है। उत्तर प्रदेश में इस बार सात चरणों में लोकसभा चुनावों के लिए मतदान होना है, जो प्रदेश की विशालता की दृष्टिसे उचित ही है।
प्रदेश में होने वाले चौथे चरण के चुनाव में 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिसमें से 11 सीटें कानपुर और इसके आसपास के इलाके की हैं। प्रदेश की 80 में 11 सीटें बहुत महत्व रखती हैं, इसलिए प्रदेश के चुनावी युद्ध का केंद्र अब कानपुर क्षेत्र बन गया है क्योंकि इन 11 लोकसभा सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है, इसलिए सभी पक्षों ने कानपुर क्षेत्र की जंग में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चौथे चरण में कानपुर क्षेत्र की जिन 11 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है, उनमें हरदोई (सुरक्षित), मिश्रिख (सुरक्षित), उन्नाव, फरुखाबाद, इटावा (सुरक्षित), कन्नौज, अकबरपुर, कानपुर, जालौन (सुरक्षित), झांसी और हमीरपुर हैं।