गर्मी में सेंट्रल स्टेशन पर पानी का काला कारोबार, रेल नीर नहीं अवैध ब्रांड की बेची जा रहीं बोतल

सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरिंग का बड़ा कारोबार है। इसके साथ ही गर्मी के मौसम में पीने के पानी की अवैध कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। रेल यात्रियों को स्वच्छ और कम दामों में पीने का पानी मिल सके, इसलिए आइआरसीटीसी की ओर से रेल नीर नाम से बोतल बंद पानी उतारा गया, जिसका दाम 15 रुपये है। नियमानुसार रेलवे स्टेशनों और चलती टे्रनों में विशेष परिस्थितियों को छोड़कर यात्रियों को केवल रेल नीर की ही सप्लाई की जानी चाहिए।

सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पानी का काला कारोबार किस कदर हो रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आइआरसीटीसी गर्मी के मौसम में अब तक एक हजार से अधिक अवैध ब्रांड बोतलबंद पानी ट्रेनों में चढ़ते हुए पकड़ चुका है। सूत्रों के मुताबिक नार्थईस्ट एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस, फरक्का एक्सप्रेस, कोटा-पटना, जोगबनी, लोकमान्य तिलक टर्मिनल आदि ट्रेनों में अवैध ब्रांड बोतल बंद पानी रोजाना सेंट्रल स्टेशन पर चढ़ाया जाता है।

पानी का अर्थ तंत्र

गर्मी में पानी की खपत को देखते हुए रेल नीर घाटे का सौदा है। रेल नीर की दस बोतलबंद वाली एक पेटी का मूल्य 126 रुपये है, जो कि 150 रुपये में बिकती है, जबकि अवैध ब्रांड की एक पेटी का मूल्य 80 रुपये है जो बिकती 200 रुपये में है। इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि रेल नीर की एक बोतल की एमआरपी 15 रुपये, लागत साढ़े 12.60 रुपये और बचत 2.40 रुपये है जबकि अवैध ब्रांड की बोतल की एमआरपी 20 रुपये, लागत आठ रुपये और बचत 12 रुपये है। कमाई के इसी अंतर की वजह से रेल नीर ट्रेनों से गायब है।

इनका ये है कहना

स्टेशन व ट्रेनों में रेल नीर को ही प्राथमिकता दी जाती है। गर्मियों में रेल नीर की कमी होती है, इसलिए कुछ दूसरे ब्रांड भी अधिकृत हैं। कुछ लोग चोरी छिपे काम कर रहे हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

– डॉक्टर जितेंद्र कुमार, स्टेशन डायरेक्टर

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